braj ke bhajan aur rasia

braj ke bhajan aur rasia
लोककवि रामचरन गुप्त 23 दिसम्बर 1994 को हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका चेतन रूप उनके सम्पर्क में आये उन सैकड़ों जेहनों को आलोकित किये है, जो इस मायावी, स्वार्थी संसार के अंधेरों से वाकिफ हैं या जिनमें इस अंधेरे को खत्म करने की छटपटाहट है। ऐसे लोगों के लिए रामचरन गुप्त आज भी एक महापुरुष, एक महान आत्मा, संघर्ष के बीच जन्मी-पली-बढ़ी एक गौरव कथा हैं। वे स्वाभिमानी, ईमानदार और मेहनतकश जि़न्दगी...More

You may also like...

Karunasagar Baap

Poetry Marathi

swarnprabha

Poetry Self-help Hindi

Albeli hun me

Poetry Romance Hindi

Snehakshar

Poetry Gujarati

Aswad Purnatecha

Poetry Marathi